खोजें

सहेजे गए लेख

आपने अभी तक अपने बुकमार्क में कोई लेख नहीं जोड़ा है!

लेख ब्राउज़ करें
Newsletter image

न्यूज़लेटर की सदस्यता लें

नए पोस्ट, समाचार और सुझावों के बारे में सूचित होने के लिए 10k+ लोगों में शामिल हों।

चिंता न करें हम स्पैम नहीं करते!

GDPR अनुपालन

हम यह सुनिश्चित करने के लिए कुकीज़ का उपयोग करते हैं कि आपको हमारी वेबसाइट पर सबसे अच्छा अनुभव मिले। हमारी साइट का उपयोग जारी रखकर, आप हमारे कुकीज़ के उपयोग, गोपनीयता नीति, और सेवा की शर्तें को स्वीकार करते हैं।

यूपी चुनाव में सपा-कांग्रेस सीट बंटवारे का फॉर्मूला लगभग तय, 'जिताऊ उम्मीदवार' बनेगा आधार...

Logo
माई पीडीए समाचार
द्वारा संपादित : KAJAL TIWARI | Thu, 11 Jun 2026 09:10 AM
  • शेयर करें:

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे की बातचीत तेज हो गई है। दिल्ली में इंडिया ब्लॉक की बैठक के बाद दोनों दलों के बीच फॉर्मूले पर सहमति बनती दिख रही है। सूत्रों के मुताबिक इस बार सीट बंटवारे का मुख्य आधार उम्मीदवार की जीत की संभावना होगी।


कांग्रेस को देने होंगे इन 4 बिंदुओं पर जवाब  

सपा ने कांग्रेस से चार सवालों पर जानकारी मांगी है:  

1. कांग्रेस किन जिलों में चुनाव लड़ना चाहती है।  

2. उन जिलों में कौन सी विधानसभा सीट चाहिए और संभावित उम्मीदवार कौन है।  

3. प्रस्तावित उम्मीदवार बीजेपी को हराने में सक्षम है या नहीं।  

4. उम्मीदवार उस क्षेत्र के जातीय-सामाजिक समीकरणों पर कितना फिट बैठता है।  


अगर किसी सीट पर सपा और कांग्रेस दोनों के मजबूत दावेदार हैं, तो तुलना कर बीजेपी को हराने वाले मजबूत उम्मीदवार को टिकट मिलेगा। सपा का कहना है कि लक्ष्य बीजेपी को हराना है, इसलिए उम्मीदवार की जीत की संभावना सबसे अहम है।


पुराना रिकॉर्ड देखकर ही मिलेगा टिकट  

सपा सूत्रों के अनुसार इस बार सिर्फ चुनाव लड़ने के लिए टिकट नहीं मिलेगा। कांग्रेस को बताना होगा कि संबंधित सीट पर पिछले चुनावों में उसका वोट प्रतिशत कितना रहा और जातीय समीकरणों में उम्मीदवार कितना मजबूत है। जहां कांग्रेस का जनाधार मजबूत होगा, वही सीट उसे दी जाएगी।


भीतरघात रोकने की तैयारी, जुलाई से शॉर्टलिस्टिंग शुरू  

सपा ने 2027 चुनाव में नाराजगी और भीतरघात रोकने के लिए रणनीति बदली है। चुनाव घोषणा से पहले ही उम्मीदवार तय करने की तैयारी है, ताकि प्रत्याशी को तैयारी का पूरा समय मिले।  


अखिलेश यादव खुद हर विधानसभा सीट पर फीडबैक ले रहे हैं। जिलाध्यक्षों और नगर कार्यकारिणी के पदाधिकारियों को बुलाकर चर्चा की जा रही है। करीब 200 सीटों पर संभावित उम्मीदवारों की पहचान हो चुकी है। जुलाई के पहले हफ्ते से शॉर्टलिस्टिंग शुरू होगी। इसके साथ ही उम्मीदवारों की जमीनी हैसियत जांचने के लिए खुफिया पड़ताल भी कराई जा रही है।


कांग्रेस की सीटें उसकी मजबूती पर निर्भर  

सपा ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस को वही सीटें मिलेंगी जहां वह मजबूत स्थिति में है। लोकसभा चुनाव 2024 में टिकट बंटवारे में हुई गड़बड़ी से हुए नुकसान को देखते हुए पार्टी इस बार गलती नहीं दोहराना चाहती।

इस विषय से संबंधित: