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विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्सों का पुनर्निर्माण शुरू, 30 नवंबर तक बहाल होने की उम्मीद...

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माई पीडीए समाचार
द्वारा संपादित : KAJAL TIWARI | Wed, 10 Jun 2026 10:53 AM
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बिहार के महत्वपूर्ण पुलों में शामिल विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्सों को दुरुस्त करने की प्रक्रिया अब तेज हो गई है। दिल्ली से पहुंची विशेषज्ञों की टीम ने पुल का तकनीकी निरीक्षण कर पुनर्निर्माण की रूपरेखा तैयार कर ली है।


निर्माण क्षेत्र की कंपनी एसपी सिंगला की आठ सदस्यीय टीम ने भागलपुर पहुंचकर पुल के विभिन्न हिस्सों की जांच की। टीम ने यह आकलन किया कि किन हिस्सों को पूरी तरह हटाना होगा और नए निर्माण में किस तकनीक का इस्तेमाल होगा। निरीक्षण के दौरान सुरक्षा मानकों, डिजाइन और निर्माण मॉडल पर भी चर्चा हुई।


तकनीकी विशेषज्ञों और बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के अधिकारियों की बैठक में तय हुआ कि क्षतिग्रस्त हिस्सों में कम्पोजिट स्टील बीम और कंक्रीट डेक आधारित संरचना तैयार की जाएगी। यह तकनीक पुल की मजबूती और दीर्घकालिक सुरक्षा को ध्यान में रखकर चुनी गई है।


बिहार राज्य पुल निर्माण निगम ने पुनर्निर्माण के लिए करीब 100 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर संबंधित विभाग को भेज दी है। स्वीकृति मिलते ही काम शुरू हो जाएगा। पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी खगड़िया पुल निर्माण प्रमंडल को सौंपी गई है।


प्रारंभिक जांच में ध्वस्त हिस्से के अलावा तीन अन्य जगहों पर भी संरचनात्मक कमजोरी मिली है। इन हिस्सों को भी हटाकर नए सिरे से बनाया जाएगा। यातायात को सुचारू रखने के लिए चार स्थानों पर बेली ब्रिज लगाए गए हैं।


पथ निर्माण मंत्री शैलेंद्र ने बताया कि पुल के पिलर 132 और 133 के बीच करीब 35 मीटर लंबा स्लैब टूटकर गंगा में गिर गया था। इसके बाद कराई गई जांच में अन्य कमजोर हिस्से भी सामने आए।  


उन्होंने बताया कि गंगा के जलीय जीवों और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए क्षतिग्रस्त स्लैब को नियंत्रित तरीके से काटकर बाहर निकाला जाएगा। निर्माण में हैगिंग सेंट्रिंग स्ट्रक्चर जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग होगा। सरकार ने 30 नवंबर तक पुल पर सामान्य परिचालन बहाल करने का लक्ष्य रखा है। अधिकारियों का कहना है कि समय पर मंजूरी मिलने पर काम तय समय सीमा में पूरा हो सकता है।  


वहीं, समानांतर बन रहे नए पुल का निर्माण कर रही एसपी सिंगला के प्रोजेक्ट डायरेक्टर जी.के. राय ने बताया कि पिछले 20 दिनों में पुल की बेयरिंग, स्लैब, पिलर, स्टील संरचना और भार वहन क्षमता की जांच की गई है। अल्ट्रासोनिक टेस्ट, रिबाउंड हैमर टेस्ट और क्रैक मैपिंग जैसी आधुनिक तकनीकों से कमजोर हिस्सों की पहचान की जा रही है, ताकि भविष्य में दुर्घटना की आशंका न रहे।

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