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साहित्यिक समारोह: माखनलाल चतुर्वेदी और विलास बिहारी झा की जयंती पर कवि-सम्मेलन ...

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माई पीडीए समाचार
द्वारा संपादित : DESK | Sun, 05 Apr 2026 12:12 PM
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पटना, ४ अप्रैल। "मुझे तोड़ लेना वनमाली, उस पथ पर देना तुम फेंक, मातृ-भूमि पर शीश चढ़ाने जिस पथ जावें वीर अनेक---" जैसी पंक्तियों से निर्मित बलिदान की भावना से सिक्त कविता 'पुष्प की अभिलाषा' के कवि पं माखनलाल चतुर्वेदी और मानवता के कवि पं विलास बिहारी झा जैसे महान साहित्यकार आलस्य में पड़े मनुष्यों की निद्रा तोड़ते हैं। ऐसे ही साहित्य से मनुष्यता का निर्माण और समाज को मार्ग-दर्शन प्राप्त होता है।


पं चतुर्वेदी एक महान स्वतंत्रता सेनानी, कवि और पत्रकार ही नहीं सच्चे अर्थों में 'भारतीय आत्मा' थे। उन्हें यह महान संबोधन राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने दिया था। यह बातें बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में शनिवार की संध्या आयोजित जयंती-समारोह और कवि सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही।


उन्होंने कहा कि चतुर्वेदी जी जीवन-पर्यन्त राष्ट्र और राष्ट्र-भाषा के लिए संघर्ष-रत रहे। स्वतंत्रता-संग्राम में जेल की यातनाएँ भी भोगी और हिन्दी के प्रश्न पर भारत सरकार को 'पद्म-भूषण सम्मान' भी वापस कर दिया। 'पुष्प की अभिलाषा' देश के लिए मर मिटनेवाले लाखों वीर सपूतों की अशेष प्रेरणा है।


पं विलास बिहारी झा को स्मरण करते हुए डा सुलभ ने कहा कि गद्य एवं पद्य में समान अधिकार रखने वाले मनीषी साहित्यकार पं झा एक अत्यंत मर्म-स्पर्शी गीतकार और बाल-साहित्य के प्रणम्य साहित्यकार थे। यश की लिप्सा से दूर रहे, इसलिए अपेक्षित सम्मान उन्हें नहीं दिया जा सका। दक्षिण-भारत में हिन्दी के विकास में उनका अत्यंत महत्त्वपूर्ण योगदान था।


समारोह के मुख्य अतिथि और राज्य उपभोक्ता संरक्षण आयोग, बिहार के अध्यक्ष न्यायमूर्ति संजय कुमार ने कहा कि चतुर्वेदी जी एक बड़े साहित्यकार तो थे ही एक बड़े स्वतंत्रता-सेनानी भी थे। महात्मा गाँधी के अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए उन्होंने अवज्ञा-आन्दोलन में सक्रिए भागीदारी दी। राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत उनकी रचानाएँ अत्यंत प्रेरणा दायी हैं।


इस अवसर पर न्यायमूर्ति श्री कुमार ने वरिष्ठ लेखिका डा गीता पुष्प शॉ को 'पं विलास बिहारी झा बाल साहित्य साधना सम्मान' से विभूषित किया। सम्मान स्वरूप डा पुष्प को पाँच हज़ार रूपए की सम्मान-राशि के साथ वन्दन-वस्त्र और प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए गए।

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