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पेंशन भुगतान के लिए आकस्मिकता निधि से 3662 करोड़ की निकासी पर तेजस्वी यादव ने उठाए सवाल...

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माई पीडीए समाचार
द्वारा संपादित : KAJAL TIWARI | Wed, 10 Jun 2026 10:47 AM
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बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के भुगतान के लिए आकस्मिकता निधि से 3662 करोड़ रुपये निकालने के कैबिनेट फैसले पर राजनीति गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से पूछा है कि क्या बिहार की वित्तीय स्थिति इतनी कमजोर हो गई है कि नियमित बजट की जगह इमरजेंसी फंड का सहारा लेना पड़ रहा है।


सोमवार को राज्य कैबिनेट ने मई, जून और जुलाई 2026 की सामाजिक सुरक्षा पेंशन देने के लिए आकस्मिकता निधि से 3662 करोड़ रुपये निकालने की मंजूरी दी थी। बुधवार को करीब 1 करोड़ पेंशनभोगियों के खाते में 1100-1100 रुपये की राशि ट्रांसफर की गई।  


आकस्मिकता निधि का इस्तेमाल आमतौर पर अप्रत्याशित संकट, प्राकृतिक आपदा या वित्तीय आपात स्थिति में किया जाता है। इसी को लेकर तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या बिहार दिवालिया होने की कगार पर है।


तेजस्वी ने कहा कि जिस राज्य में पेंशन देने के लिए भी आकस्मिकता निधि का इस्तेमाल हो रहा है, वहां हालात गंभीर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 4-5 महीनों से कर्मचारियों का वेतन और पेंशन का भुगतान नहीं हो रहा है। ठेकेदारों का बकाया भी एक साल से अटका है।  


उन्होंने यह भी कहा कि 2023-24 में स्वीकृत कई योजनाओं पर काम शुरू नहीं हुआ है। बिजली कटौती बढ़ी है, छात्रवृत्ति का पैसा रुका है और स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना ठप पड़ी है। फंड की कमी के चलते कैबिनेट ने बिहार राज्य फसल सहायता योजना को भी बंद कर दिया है।


तेजस्वी ने कहा कि डबल इंजन सरकार के कार्यकाल में ऐसी स्थिति क्यों बनी, इसका जवाब मुख्यमंत्री को देना चाहिए। उनका कहना है कि नियमित बजटीय प्रावधान की जगह आकस्मिकता निधि से पैसा निकालना वित्तीय प्रबंधन पर सवाल खड़े करता है।  


उन्होंने मांग की कि गैर-जरूरी मुद्दों पर ध्यान देने की बजाय सरकार को प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर जनता को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

फिलहाल सरकार की ओर से इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन पेंशन के लिए इमरजेंसी फंड के इस्तेमाल ने बिहार की वित्तीय स्थिति को लेकर बहस छेड़ दी है।

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