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झारखंड राज्यसभा चुनाव में बीजेपी समर्थित निर्दलीय परिमल नाथवानी के नामांकन पर उठे सवाल, क्या रद्द होगा पर्चा?

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माई पीडीए समाचार
द्वारा संपादित : KAJAL TIWARI | Thu, 11 Jun 2026 09:12 AM
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झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के चुनाव से पहले बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी का नामांकन चर्चा में है। उनके नामांकन में नाम की वर्तनी और कुछ जानकारियों को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई हैं।


आरोप है कि कुछ दस्तावेजों में नाम 'परिमल नाथवानी' लिखा है, जबकि कुछ में 'नाथवानी परिमल'। इसके अलावा उन पर कई कंपनियों में निदेशक रहने की जानकारी नामांकन फॉर्म में न देने, आपराधिक मामलों का ब्योरा न देने और फॉर्म के कुछ कॉलम खाली छोड़ने का आरोप है।


नाम की वर्तनी में गलती पर क्या कहता है कानून  

अगर गलती के बावजूद उम्मीदवार की पहचान स्पष्ट हो रही है तो नामांकन रद्द नहीं होता। प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 36(4) के मुताबिक, रिटर्निंग ऑफिसर मामूली या अनजाने में हुई त्रुटि के आधार पर नामांकन खारिज नहीं कर सकते।  


मामूली वर्तनी की गलती, नाम या पते में थोड़ा अंतर, या चुनाव चिह्न से जुड़ी अधूरी जानकारी को तकनीकी त्रुटि माना जाता है। इन कारणों से पर्चा रद्द नहीं किया जाता।


किन स्थितियों में रद्द हो सकता है नामांकन  

रिटर्निंग ऑफिसर नामांकन तभी रद्द कर सकते हैं जब कोई ठोस कानूनी आधार हो। इनमें शामिल हैं:  

उम्मीदवार चुनाव लड़ने की योग्यता न रखता हो या अयोग्य घोषित हो।  

नामांकन पत्र या जरूरी दस्तावेज समय पर जमा न किए गए हों।  

नामांकन तय स्थान या अधिकृत अधिकारी के अलावा किसी और को सौंपा गया हो।  

नामांकन निर्धारित प्रारूप में न हो, प्रस्तावकों की संख्या पूरी न हो, या हस्ताक्षर नकली हों।  

सुरक्षा राशि जमा न की गई हो।  

हलफनामे में जरूरी कॉलम खाली छोड़ दिए गए हों और नोटिस के बाद भी सुधार न किया गया हो।  

उम्मीदवार ने उम्र का उल्लेख न किया हो।  


अब रिटर्निंग ऑफिसर को देखना है कि परिमल नाथवानी के मामले में दर्ज आपत्तियां मामूली त्रुटि हैं या नामांकन रद्द करने लायक कोई ठोस कानूनी कारण बनता है।

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