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शहीद शुभम कुमार की मुआवजा राशि को लेकर परिवार और प्रशासन आमने सामने

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माई पीडीए समाचार
द्वारा संपादित : KAJAL TIWARI | Fri, 19 Jun 2026 12:06 PM
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असम के जोरहाट विमान हादसे में शहीद हुए वायुसेना के फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार की शहादत के बाद अब विवाद खड़ा हो गया है। जहानाबाद के बनवरिया गांव में उनके परिवार और प्रशासन के बीच मुआवजा राशि और वैवाहिक स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।


शुभम कुमार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई थी। पूरे बिहार ने उनके बलिदान को सलाम किया था। लेकिन अब बिहार सरकार की ओर से दी जाने वाली आर्थिक सहायता राशि को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है।


पिता ने उठाए सवाल  

शहीद के पिता अमरेंद्र शर्मा का कहना है कि 21 लाख रुपये की सहायता राशि कथित पत्नी श्रेया राय को दे दी गई, जबकि परिवार को इसकी जानकारी तक नहीं दी गई। उनका आरोप है कि न किसी कार्यक्रम की सूचना दी गई और न यह बताया गया कि भुगतान कहां और कैसे किया जा रहा है।


अमरेंद्र शर्मा का कहना है कि परिवार को हमेशा बताया गया था कि शुभम की शादी तय हो चुकी है और नवंबर में हिंदू रीति रिवाज से विवाह होना है। घर में तैयारियां भी चल रही थीं। ऐसे में अचानक कोर्ट मैरिज की बात सामने आने से परिवार हैरान है। 


उनका कहना है कि अगर कोर्ट मैरिज हुई थी तो इसकी जानकारी न उन्हें दी गई, न उनकी पत्नी को और न ही परिवार के अन्य सदस्यों को। पिता का दावा है कि उन्होंने बेटे की शादी पारंपरिक तरीके से देखने का सपना देखा था।


प्रशासन ने दी सफाई  

जहानाबाद के अनुमंडल पदाधिकारी राजीव रंजन सिन्हा का कहना है कि सरकारी और विभागीय रिकॉर्ड में श्रेया राय को शुभम कुमार की विधिक पत्नी दर्ज किया गया है। नियमों के अनुसार आर्थिक सहायता और सरकारी लाभ उसी को दिए जा रहे हैं। 


प्रशासन का तर्क है कि सरकारी प्रक्रिया भावनाओं पर नहीं, दस्तावेजों पर चलती है। रिकॉर्ड में पत्नी का नाम है तो सहायता राशि उसी के खाते में जाएगी।


गांव में चर्चा का विषय बना मामला  

बनवरिया गांव में शुभम कुमार का नाम आज भी सम्मान से लिया जाता है। गांव वालों को गर्व है कि उनका बेटा वायुसेना में अधिकारी था और देश के लिए शहीद हुआ। लेकिन अब चौपालों पर चर्चा शहादत से ज्यादा मुआवजे और रिश्तों के विवाद को लेकर हो रही है।


कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर विवाह हुआ था तो परिवार को जानकारी क्यों नहीं दी गई। वहीं कुछ का कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड में पत्नी का नाम दर्ज है तो प्रशासन उसी आधार पर फैसला लेगा। 


पिता ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अगर श्रेया राय वास्तव में शुभम की पत्नी थीं तो शहादत के बाद उन्हें परिवार के साथ कुछ समय बिताना चाहिए था।

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