खोजें

सहेजे गए लेख

आपने अभी तक अपने बुकमार्क में कोई लेख नहीं जोड़ा है!

लेख ब्राउज़ करें
Newsletter image

न्यूज़लेटर की सदस्यता लें

नए पोस्ट, समाचार और सुझावों के बारे में सूचित होने के लिए 10k+ लोगों में शामिल हों।

चिंता न करें हम स्पैम नहीं करते!

GDPR अनुपालन

हम यह सुनिश्चित करने के लिए कुकीज़ का उपयोग करते हैं कि आपको हमारी वेबसाइट पर सबसे अच्छा अनुभव मिले। हमारी साइट का उपयोग जारी रखकर, आप हमारे कुकीज़ के उपयोग, गोपनीयता नीति, और सेवा की शर्तें को स्वीकार करते हैं।

रिशु श्री केस की जांच में बड़ा खुलासा: रिटायर इंजीनियर की संविदा नियुक्ति पर उठे सवाल...

Logo
माई पीडीए समाचार
द्वारा संपादित : KAJAL TIWARI | Wed, 10 Jun 2026 10:44 AM
  • शेयर करें:

बिहार में रिशु श्री से जुड़े कथित टेंडर घोटाले और भ्रष्टाचार मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में पुराने फैसलों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। विशेष निगरानी इकाई (SVU) द्वारा भवन निर्माण विभाग के पूर्व मुख्य अभियंता तारिणी दास की गिरफ्तारी के बाद मामला सिर्फ आरोपों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन लोगों तक पहुंच गया है जिन्होंने कथित तौर पर उन्हें संरक्षण दिया।


दस्तावेजों के अनुसार तारिणी दास 31 अक्टूबर 2024 को मुख्य अभियंता पद सेवानिवृत्त हुए। इसके महज 9 दिन बाद, 9 नवंबर 2024 को उन्हें दो साल के लिए संविदा पर नियुक्त कर दिया गया। जबकि राज्य मंत्रिपरिषद ने इस प्रस्ताव को 19 नवंबर को मंजूरी दी थी।  


इससे सवाल उठ रहा है कि कैबिनेट की अंतिम मंजूरी से पहले नियुक्ति आदेश कैसे जारी हुआ। क्या यह किसी दबाव या संरक्षण का परिणाम था?


संविदा पर नियुक्ति के साथ ही तारिणी दास को भवन निर्माण निगम लिमिटेड में मुख्य महाप्रबंधक का अतिरिक्त प्रभार भी दे दिया गया। सामान्य तौर पर सेवानिवृत्त अधिकारियों को एक पद दिया जाता है, लेकिन यहां अतिरिक्त जिम्मेदारी ने उनके विभागीय प्रभाव को लेकर चर्चाओं को हवा दी।


एसवीयू और ईडी की जांच में टेंडर आवंटन, सरकारी परियोजनाओं में अनियमितता और अवैध लेन-देन के आरोप सामने आए हैं। फुलवारीशरीफ स्थित तारिणी दास के ठिकानों पर छापेमारी में करोड़ों रुपये नकद मिलने की बात सामने आई। इसके तुरंत बाद शाम को उनकी संविदा नियुक्ति रद्द कर दी गई।


इतनी बड़ी राशि मिलने के बाद अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह केवल एक अधिकारी की व्यक्तिगत कमाई थी या पूरे सिस्टम का हिस्सा।


एसवीयू ने कांड संख्या 05/25 के तहत कार्रवाई करते हुए मुमुक्षु चौधरी, तारिणी दास और उमेश कुमार सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया है। वहीं इस मामले में पहले से नाम आ रहे आईएएस अधिकारी संजीव हंस का पता नहीं चल सका है। सूत्रों के मुताबिक वह राज्य से बाहर हैं।


राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि तारिणी दास अकेले इतने बड़े फैसले नहीं करा सकते थे। सवाल यह है कि उनकी नियुक्ति, अतिरिक्त प्रभार और विभाग में प्रभाव बनाए रखने के पीछे कौन लोग थे। 


जांच एजेंसियां फिलहाल आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कह रही हैं, लेकिन तारिणी दास की गिरफ्तारी ने कई पुरानी फाइलों को फिर से खुलवाया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच सिर्फ निचले स्तर के अधिकारियों तक सीमित रहेगी या निर्णय प्रक्रिया में शामिल बड़े नामों तक भी पहुंचेगी।

इस विषय से संबंधित: