खोजें

सहेजे गए लेख

आपने अभी तक अपने बुकमार्क में कोई लेख नहीं जोड़ा है!

लेख ब्राउज़ करें
Newsletter image

न्यूज़लेटर की सदस्यता लें

नए पोस्ट, समाचार और सुझावों के बारे में सूचित होने के लिए 10k+ लोगों में शामिल हों।

चिंता न करें हम स्पैम नहीं करते!

GDPR अनुपालन

हम यह सुनिश्चित करने के लिए कुकीज़ का उपयोग करते हैं कि आपको हमारी वेबसाइट पर सबसे अच्छा अनुभव मिले। हमारी साइट का उपयोग जारी रखकर, आप हमारे कुकीज़ के उपयोग, गोपनीयता नीति, और सेवा की शर्तें को स्वीकार करते हैं।

राबड़ी देवी के बंगला खाली करने के नोटिस पर बवाल, RJD ने उठाए सम्राट चौधरी समेत कई नेताओं पर सवाल

Logo
माई पीडीए समाचार
द्वारा संपादित : KAJAL TIWARI | Wed, 03 Jun 2026 11:56 AM
  • शेयर करें:

पटना: बिहार में सरकारी बंगलों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को पटना के 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास खाली करने का नोटिस जारी किया है। इस आवास को कैबिनेट मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।


राबड़ी देवी ने कहा है कि वह स्वेच्छा से आवास खाली नहीं करेंगी। अगर सरकार चाहे तो उन्हें जबरन बाहर निकाल सकती है। उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद शुरू हो गया।


इसके जवाब में RJD ने सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी कर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और NDA नेताओं पर निशाना साधा। पार्टी का आरोप है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी ने 1 अणे मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास के आसपास कई सरकारी बंगलों को परिसर में शामिल कर लिया, जिससे कुल क्षेत्रफल करीब 15 एकड़ हो गया। RJD ने सवाल उठाया कि क्या मुख्यमंत्री को रहने और कार्यालय के लिए इतनी बड़ी जमीन जरूरी है।


पार्टी ने मुख्यमंत्री आवास का नाम बदलकर "लोक सेवक आवास" किए जाने पर भी सवाल उठाए और इसे विस्तार को जायज ठहराने की कोशिश बताया। सरकार की ओर से इन आरोपों पर अब तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है।


RJD ने सांसद देवेश चंद्र ठाकुर, संजय झा, उपेंद्र कुशवाहा, पूर्व मंत्री राजू सिंह, कृष्ण कुमार मंटू और पूर्व विधायक ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू समेत कई नेताओं के पटना स्थित सरकारी आवासों पर भी सवाल खड़े किए। पार्टी का कहना है कि कुछ नेताओं के पास दिल्ली में सरकारी आवास होने के बावजूद पटना में भी बंगले बने हुए हैं।


सत्तारूढ़ गठबंधन का कहना है कि सभी आवास नियमों और पात्रता के अनुसार आवंटित किए गए हैं। सरकार के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री, सांसद, मंत्री और अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए अलग-अलग नियम हैं।


फिलहाल यह मुद्दा बिहार की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। एक तरफ सरकार नियमों का हवाला दे रही है, तो विपक्ष दोहरे मापदंड का आरोप लगा रहा है। अब देखना होगा कि मामला बयानबाजी तक सीमित रहता है या सरकारी आवासों की समीक्षा शुरू होती है।

इस विषय से संबंधित: