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भरत तिवारी एनकाउंटर केस में पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलासा, शरीर में मिलीं पांच गोलियां...

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माई पीडीए समाचार
द्वारा संपादित : KAJAL TIWARI | Sat, 27 Jun 2026 12:00 PM
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भोजपुर: चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट से बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि भरत तिवारी को एक या दो नहीं, बल्कि कुल पांच गोलियां लगी थीं। परिवार पहले से ही पांच गोली मारे जाने का दावा कर रहा था।


आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक, पोस्टमार्टम में बताया गया है कि पहली गोली बाएं जांघ के ऊपरी हिस्से में सामने की ओर लगी थी। दूसरी गोली भी बाएं जांघ के मध्य भाग में भीतर की तरफ लगी मिली। तीसरी गोली दाहिनी जांघ के बीच वाले हिस्से में भीतर लगी थी। चौथी गोली दाहिनी जांघ में बाहरी हिस्से से अंदर की ओर गई थी। पांचवीं गोली बाएं पैर के मध्य भाग में पीछे की तरफ से लगी थी।


सरकार ने लिया संज्ञान, न्यायिक आयोग गठित  

इस कथित फर्जी मुठभेड़ को लेकर पिछले कई दिनों से सियासत गरम है। विपक्ष सरकार पर हमलावर है और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। इसी बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि इस घटना में शामिल कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल न्यायिक आयोग के गठन का फैसला किया है।


गुरुवार को पटना में ‘संविधान हत्या दिवस’ कार्यक्रम में सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि भोजपुर की घटना पर सरकार ने तुरंत संज्ञान लिया है। उच्च स्तरीय न्यायिक आयोग का गठन किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर सख्त कार्रवाई होगी।


परिवार का आरोप, पुलिस पर दर्ज हुआ केस  

भरत तिवारी भोजपुर के बिलौटी गांव के रहने वाले थे। दावा है कि वह सोशल मीडिया पर नदी कटाव, भ्रष्टाचार और स्थानीय मुद्दों पर आवाज उठाते थे। 17 जून 2026 को पुलिस एनकाउंटर में उनकी मौत हो गई। पुलिस का कहना है कि वह हथियारबंद था और फायरिंग के दौरान मारा गया। वहीं परिवार और गांव वालों का आरोप है कि उसने सरेंडर कर दिया था, फिर भी गोली मारी गई। 


इसके बाद परिवार की शिकायत पर शाहपुर थाने में SDPO समेत कई पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज हुआ है। SDPO को पद से हटाया गया और रिटायर्ड जज की अगुवाई में न्यायिक जांच आयोग गठित किया गया है। सीएम ने भरोसा दिया है कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा।


प्रशासनिक सख्ती का संकेत  

सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि लोगों को समय पर न्याय और प्रशासनिक राहत मिले। उन्होंने यह भी कहा कि अगर 30 दिनों के भीतर आवेदन पर आदेश जारी नहीं होता है तो 31वें दिन संबंधित अधिकारी को सीधे निलंबित करने का आदेश मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी होगा।

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