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भरत तिवारी एनकाउंटर का असर यूपी की सियासत पर, अजय राय पहुंचे पीड़ित परिवार से मिलने...

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माई पीडीए समाचार
द्वारा संपादित : KAJAL TIWARI | Sat, 27 Jun 2026 11:57 AM
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लखनऊ/बक्सर: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन सियासी समीकरण बिठाने का खेल अभी से शुरू हो चुका है। बिहार के बक्सर में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर की गूंज अब यूपी तक पहुंच गई है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय शनिवार को अचानक भरत तिवारी के घर पहुंचे। 


अजय राय का यह दौरा सिर्फ शोक संवेदना जताने तक सीमित था या यूपी चुनाव 2027 से पहले ब्राह्मण कार्ड खेलने की रणनीति का हिस्सा है, इस पर सियासी चर्चा तेज हो गई है। पूर्वांचल के इलाके में इस एनकाउंटर को लेकर ब्राह्मण समाज में नाराजगी है और विपक्ष, खासकर सपा और कांग्रेस, इसे मुद्दा बनाने में जुट गया है।


क्या है भरत तिवारी एनकाउंटर मामला  

बिहार के भोजपुर में पुलिस ने लाइव एनकाउंटर के दौरान भरत तिवारी को ढेर कर दिया था। पुलिस का कहना है कि तिवारी कई मामलों में वांछित था और उसने सरेंडर करने के बजाय फायरिंग शुरू कर दी। लेकिन एनकाउंटर का वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों, मानवाधिकार संगठनों और राजनीतिक दलों ने इसे फर्जी एनकाउंटर और टारगेट किलिंग बताया है। 


प्रशांत किशोर की जन सुराज, राजद और अब कांग्रेस ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। दबाव बढ़ने के बाद पुलिस प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा और मामले में शामिल पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज की गई है।


यूपी की सियासत पर पड़ेगा असर  

उत्तर प्रदेश में विपक्ष लगातार योगी सरकार पर एनकाउंटर राज और जाति देखकर कार्रवाई करने के आरोप लगाता रहा है। अब बिहार में हुए इस ब्राह्मण युवक के एनकाउंटर की गूंज यूपी में भी सुनाई दे रही है। भरत तिवारी का कनेक्शन और ब्राह्मण समाज का प्रभाव यूपी-बिहार के सीमावर्ती जिलों जैसे बलिया, गाजीपुर, चंदौली में भी है।


कानपुर में विकास दुबे से लेकर भरत तिवारी तक, विपक्ष इसे ब्राह्मणों पर अत्याचार के नैरेटिव के रूप में पेश कर रहा है। अजय राय खुद भूमिहार ब्राह्मण समाज से आते हैं। उनका पीड़ित परिवार से मिलना कांग्रेस की खोई जमीन वापस पाने की कोशिश माना जा रहा है। पूर्वांचल की 100 से अधिक सीटों पर ब्राह्मण और सवर्ण मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं, जहां यह मुद्दा असर डाल सकता है।


न्याय की लड़ाई लड़ने का ऐलान  

पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने सरकार और पुलिस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह कोई एनकाउंटर नहीं, बल्कि कानून की धज्जियां उड़ाकर की गई सीधी हत्या है। जब पुलिस ही जज और जल्लाद बन जाएगी, तो अदालतों पर ताला लगा देना चाहिए। अजय राय ने कहा कि भरत तिवारी के परिवार को इंसाफ दिलाने के लिए कांग्रेस पार्टी सड़क से सदन तक लड़ाई लड़ेगी। जाति विशेष को निशाना बनाने की नीति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


2027 का सियासी खेल शुरू  

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन अब गैर यादव ओबीसी के साथ नाराज सवर्णों, खासकर ब्राह्मणों को अपने पाले में लाने की रणनीति पर काम कर रहा है। यूपी में अक्सर यह नैरेटिव बनाने की कोशिश होती रही है कि मौजूदा व्यवस्था में एक खास वर्ग को ही तरजीह मिलती है। 


बिहार में हुए इस एनकाउंटर ने यूपी के विपक्ष को एक ऐसा मुद्दा दे दिया है, जिससे वे एनकाउंटर नीति पर सवाल उठाने के साथ ब्राह्मण समाज की सहानुभूति भी बटोर सकते हैं। अजय राय का यह कदम संकेत दे रहा है कि 2027 के चुनाव में कानून व्यवस्था, फर्जी एनकाउंटर और जातीय उपेक्षा बड़े चुनावी मुद्दे बन सकते हैं।

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