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बिहार शिक्षा विभाग में बड़ा फेरबदल, 6 वरिष्ठ अधिकारी निलंबित-बर्खास्त, वेतन-पेंशन में कटौती

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माई पीडीए समाचार
द्वारा संपादित : KAJAL TIWARI | Tue, 23 Jun 2026 02:42 PM
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पटना: बिहार की शिक्षा व्यवस्था में सुधार और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बड़ी कार्रवाई की है। उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद लापरवाह और दागी अधिकारियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाते हुए 6 वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित और बर्खास्त किया गया है।


इसके अलावा कई अन्य दोषी अधिकारियों के वेतन और पेंशन में स्थायी कटौती के आदेश भी जारी किए गए हैं। इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। कार्रवाई की जद में भोजपुर, बांका, सुपौल और मधुबनी के डीईओ, डीपीओ और बीईओ शामिल हैं।


घूसखोरी और नियुक्ति में गड़बड़ी पर चला हंटर  

शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार और काम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। भोजपुर के तत्कालीन डीपीओ मोहम्मद इरशाद अंसारी पर वित्तीय अनियमितता और सरकारी फंड के गबन के आरोप साबित होने पर उन्हें बर्खास्त कर दिया गया।


बांका के तत्कालीन डीईओ सह डीपीओ पवन कुमार को भ्रष्टाचार और विभागीय लापरवाही के आरोप में निलंबित किया गया है। वे वर्तमान में पूर्वी चंपारण में डीपीओ के पद पर तैनात हैं। सुपौल के तत्कालीन डीईओ रामाशीष महतो पर बिहार शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगने पर उन पर निलंबन की कार्रवाई की गई है।


मधुबनी और बांका के अधिकारी भी निशाने पर  

बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के तत्कालीन सचिव राजेश कुमार को प्रशासनिक लापरवाही और फाइलों को अटकाने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। मधुबनी के मधेपुर की प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी मरजीना खातून पर एसएलसी जारी करने के एवज में घूस लेने का आरोप साबित होने पर 18 मई से निलंबन आदेश प्रभावी माना जाएगा। बांका के तत्कालीन डीईओ देवेंद्र झा पर भी कर्तव्यहीनता के आरोप में कार्रवाई हुई है।


आर्थिक दंड से भ्रष्टाचार पर लगाम की कोशिश  

शिक्षा मंत्री ने कहा कि आर्थिक अनियमितता साबित होने पर अधिकारियों के खिलाफ वेतन और पेंशन कटौती जैसी कठोर कार्रवाई की गई है। सरकार का मानना है कि ऐसे कदमों से अधिकारियों में कानून और ईमानदारी का भय पैदा होगा और व्यवस्था में सुधार आएगा।

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