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बिहार की सियासत में जातीय रंग हावी, हर मुद्दे पर बन रहा जाति का चश्मा..

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माई पीडीए समाचार
द्वारा संपादित : KAJAL TIWARI | Sat, 27 Jun 2026 11:47 AM
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पटना: बिहार की राजनीति इन दिनों जातीय संकीर्णता की गिरफ्त में आती दिख रही है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कोई भी घटना हो, उसे जातीय चश्मे से देखा जाने लगता है। इससे लोकतंत्र का असल मकसद पीछे छूट रहा है। विरोध के लिए विरोध और जातीय गोलबंदी का औजार बनता जा रहा है। 


पीएमसीएच प्राचार्य का मामला  

पटना मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रभारी प्रिंसिपल डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह को हटाए जाने के मामले में भी जातीय रंग देने की कोशिश शुरू हो गई है। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की ओर से की गई प्रशासनिक कार्रवाई को डॉ. सिंह तानाशाही और साजिश बता रहे हैं। उनका कहना है कि मंत्री और सचिव फोन तक नहीं उठाते। 


वहीं सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई को जातीय समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में एक वर्ग इसे खास जाति के अधिकारी को निशाना बनाने के रूप में प्रचारित कर रहा है। इस दौरान नीट छात्रा रेप और मौत केस में चर्चा में आए प्रभात हॉस्पिटल के मालिक डॉ. सतीश सिंह का मामला भी उठाया जा रहा है। 6 जनवरी 2026 को पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा के साथ हुई घटना में प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल के मालिक का नाम घसीटे जाने पर भी तब जातीय रंग देने के आरोप लगे थे।


भरत तिवारी एनकाउंटर पर सियासत  

भोजपुर में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर भी जातीय तनाव पैदा करने की कोशिश हो रही है। इस मुद्दे पर राज्य में सवर्ण बनाम दलित पिछड़ा की पारंपरिक राजनीति को हवा देने की कोशिश की जा रही है। यह तब हो रहा है जब बिलौटी गांव में पिछड़ी और दलित जाति के युवा भी भरत तिवारी की तारीफ करते हैं और उसे जातीय दायरे में नहीं रखना चाहते। 


लेकिन भरत तिवारी के ब्राह्मण समुदाय से होने के कारण कई सवर्ण संगठन और स्थानीय लोग इस एनकाउंटर को फर्जी बताकर सड़क पर उतर आए हैं। इससे स्थानीय स्तर पर सभी जातियों के बीच लोकप्रिय रहे भरत तिवारी को भी जातीय संकीर्णता की ओर धकेला जा रहा है।


हरा गमछा विवाद  

राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ओर से एआई समिट के दौरान हरा गमछा पर दिए गए बयान को भी जातीय रंग दे दिया गया। पटना में एआई समिट के दौरान सीएम ने कहा था कि यदि संदिग्ध अपराधियों को पकड़ना हो तो एआई कैमरों को सिर्फ हरा गमछा वालों को पकड़ने का निर्देश देने पर वह तुरंत उन्हें दबोच लेगा। इस बयान का जातीय मतलब निकाल कर मुख्यमंत्री पर हमला शुरू कर दिया गया।


एनकाउंटर पर भी जातीय आरोप  

गृह विभाग की ओर से चलाए गए एनकाउंटर अभियान पर भी जातीय आरोप लगे। तेजस्वी यादव ने सम्राट सरकार पर एक खास जाति के एनकाउंटर का आरोप लगाया। भाई वीरेंद्र ने तो एक सूची जारी कर यह बताने की कोशिश की कि अब तक कितने यादव अपराधियों का एनकाउंटर या हॉफ एनकाउंटर हुआ है।


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