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बाहुबल और गैंगवार की धरती, अनंत सिंह से सोनू-मोनू गैंग तक, जानिए दशकों का खौफनाक इतिहास

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माई पीडीए समाचार
द्वारा संपादित : KAJAL TIWARI | Mon, 01 Jun 2026 12:49 PM
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पटना: बिहार की राजनीति और अपराध की दुनिया में मोकामा सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि बाहुबल, गैंगवार और राजनीतिक दबदबे की कहानियों की किताब है। पटना से करीब 90 किलोमीटर दूर गंगा किनारे बसा मोकामा का टाल इलाका दशकों से सत्ता और बंदूक के गठजोड़ का केंद्र रहा है।


हाल ही में सोनू-मोनू गैंग के घर छापा मारने गई पुलिस टीम को गुर्गों के सामने लाइन में लगकर तलाशी देनी पड़ी। घटना के बाद SSP ने दो थानाध्यक्षों को निलंबित कर दिया। इस घटना ने मोकामा के पुराने गैंगवार और बाहुबलियों के इतिहास को फिर चर्चा में ला दिया।


अनंत सिंह – मोकामा के 'छोटे सरकार'  

लदमा गांव के रहने वाले अनंत सिंह मोकामा के सबसे चर्चित बाहुबली रहे हैं। उनके बड़े भाई दिलीप सिंह 90 के दशक में लालू सरकार में मंत्री थे। भाई के निधन के बाद अनंत सिंह ने मोकामा की कमान संभाली और जदयू, राजद और निर्दलीय रहकर विधायक बने। 


2019 में उनके घर से AK-47 और हैंड ग्रेनेड मिलने के बाद उन्हें सजा हुई और विधायकी चली गई। 2024 में पटना हाई कोर्ट ने सबूतों के अभाव में उन्हें बरी कर दिया। 2025 में दुलारचंद यादव हत्याकांड में जेल में रहते हुए भी उन्होंने चुनाव जीता। फिलहाल वे जमानत पर बाहर हैं।


विवेका पहलवान – सबसे बड़ा विरोधी  

अनंत सिंह को तीन दशकों तक चुनौती देने वाले विवेका पहलवान भी लदमा के ही रहने वाले थे। भाई की हत्या के बाद उन्होंने हथियार उठाए और सूरजभान सिंह के साथ मिलकर अनंत सिंह गुट पर कई हमले किए। 2004-05 में नदवां गांव में अनंत सिंह के काफिले पर AK-47 से हमले के मास्टरमाइंड वही माने जाते हैं। 2019 में अनंत सिंह के घर से AK-47 मिलने की सूचना भी पुलिस को उन्होंने ही दी थी। बीमारी के कारण बाद में उनका निधन हो गया।


सूरजभान सिंह – 90 के दशक का खौफ  

मोकामा-बेगूसराय बेल्ट में सूरजभान सिंह का नाम 90 के दशक में खौफ का पर्याय था। रेलवे ठेकों, स्क्रैप और गंगा के रास्ते रंगदारी पर कब्जे को लेकर उनका अनंत सिंह से सालों तक गैंगवार चला। बृज बिहारी प्रसाद और रामी सिंह हत्याकांड में उनका नाम आया। बाद में उन्होंने राजनीति में कदम रखा और LJP से सांसद बने। 2025 के चुनाव में उनकी पत्नी अनंत सिंह से हार गईं।


सोनू-मोनू गैंग – नया युवा गुट  

नौरांगा जलालपुर के रहने वाले सोनू और मोनू सिंह इस वक्त अनंत सिंह को सबसे आक्रामक चुनौती दे रहे हैं। रंगदारी, ठेकेदारी और जमीनी विवादों में इनका नाम तेजी से उभरा है। 22 जनवरी 2025 को नौरांगा गोलीकांड में दोनों गुटों के बीच 100 राउंड फायरिंग हुई थी। हाल ही में अनंत सिंह के करीबी मुकेश सिंह पर हमले के बाद पुलिस रेड के दौरान गैंग समर्थकों ने पुलिसकर्मियों की तलाशी ली, जिसका वीडियो वायरल हो गया।


दुलारचंद यादव – जातिगत समीकरण बदलने वाला नाम  

टाल इलाके में भूमिहारों के दबदबे के बीच दुलारचंद यादव ने पिछड़ी जातियों को लामबंद किया। फसल कटनी और जमीन कब्जे को लेकर उनका अनंत सिंह गुट से लगातार संघर्ष होता रहा। 2025 के चुनाव प्रचार के दौरान उनकी हत्या कर दी गई, जिसका आरोप परिवार ने अनंत सिंह गुट पर लगाया।


पुराने दौर के गैंगस्टर  

80 के दशक में नागा सिंह, नाटा सिंह और गिरधारी गिरोह का मोकामा रेलवे यार्ड और कोयला डिपो पर दबदबा था। मालगाड़ी लूट और कोयला चोरी इनका मुख्य धंधा था। पुलिस एनकाउंटर और आपसी रंजिश में ये गैंग खत्म हो गए और मोकामा की कमान नए बाहुबलियों के हाथ में आ गई।

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