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हरिवंश नारायण सिंह जेडीयू से टिकट नहीं, राष्ट्रपति कोटे से राज्यसभा में वापसी...

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माई पीडीए समाचार
द्वारा संपादित : KAJAL TIWARI |
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हरिवंश नारायण सिंह का राज्यसभा में वापसी का रास्ता जेडीयू ने नहीं, बल्कि राष्ट्रपति ने खोला है। जेडीयू ने इस बार उन्हें अपने कोटे से राज्यसभा नहीं भेजा, लेकिन राष्ट्रपति ने उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत कर दिया। हरिवंश दो बार जेडीयू की ओर से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं और राज्यसभा के उपसभापति के पद पर भी रह चुके हैं।


हरिवंश के शांत स्वभाव, संसदीय मर्यादा और संचालन क्षमता को देखते हुए उन्हें सभी दलों में सम्मान की नजर से देखा जाता है। यही वजह है कि जेडीयू ने उन्हें अपने कोटे से राज्यसभा नहीं भेजा, तब भी उनकी राजनीतिक प्रासंगिकता बनी रही।


भारत में राष्ट्रपति कोटे से राज्यसभा में कुल 12 सदस्य मनोनीत किए जाते हैं। इन सदस्यों को साहित्य, विज्ञान, कला और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष योगदान के आधार पर चुना जाता है। हरिवंश का नाम भी इसी सूची में शामिल किया गया है, जो उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और पत्रकारिता से लेकर राजनीति तक के अनुभव को दर्शाता है।


हरिवंश की राज्यसभा में वापसी से बिहार की राजनीति में एक बार फिर से हलचल मच गई है। जेडीयू ने राज्यसभा के लिए अपने उम्मीदवारों में बदलाव करते हुए नीतीश कुमार और रामनाथ ठाकुर को मैदान में उतारा था। ऐसे में यह माना जा रहा था कि हरिवंश का राज्यसभा सफर यहीं खत्म हो सकता है। लेकिन राष्ट्रपति कोटे से उनके मनोनयन ने सभी अटकलों पर विराम लगा दिया।


हरिवंश पहले भी दो बार जेडीयू की ओर से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं और अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने सदन के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उपसभापति के रूप में उनकी कार्यशैली को अक्सर संतुलित और निष्पक्ष माना गया है। ऐसे में उनका दोबारा राज्यसभा में आना संसद के लिए भी एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

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