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चैती छठ का शुभारंभ: गया के घाटों पर आस्था की उमंग, व्रतियों ने ‘नहाय-खाय’ से किया पर्व का आगाज

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माई पीडीए समाचार
द्वारा संपादित : DESK |
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गया: लोक आस्था का महापर्व चैती छठ पूजा का आज से विधिवत शुभारंभ हो गया। चार दिनों तक चलने वाले इस पावन पर्व के पहले दिन ‘नहाय-खाय’ के साथ व्रत की शुरुआत होती है। इसी क्रम में गया शहर के विभिन्न घाटों, विशेषकर छत्रपति घाट पर सुबह से ही व्रतियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने पवित्र नदी में स्नान कर घरों की शुद्धि की और भगवान सूर्यनारायण की आराधना की। ‘नहाय-खाय’ के दिन व्रती शुद्ध एवं सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत का संकल्प लेते हैं, जिससे छठ महापर्व की विधिवत शुरुआत होती है।


घाटों पर भक्ति और श्रद्धा का अनोखा संगम देखने को मिला, जहां महिलाएं और पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में भगवान भास्कर की पूजा-अर्चना करते नजर आए। इस दौरान छठ व्रती इंदु शर्मा ने बताया कि छठ पर्व पूरी श्रद्धा और नियम के साथ किया जाता है। पहले दिन ‘नहाय-खाय’ में स्नान कर शुद्ध भोजन किया जाता है, दूसरे दिन ‘खरना’ (लोहंडा) होता है, जबकि तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन उषा अर्घ्य के साथ पारण किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह पर्व मनोकामना पूर्ति, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए किया जाता है।


वहीं, व्रती संजू देवी ने बताया कि छठ पर्व केवल मनोकामना के लिए ही नहीं, बल्कि परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए भी किया जाता है। उन्होंने कहा कि वह हर साल कार्तिक छठ करती हैं, लेकिन चैती छठ पहली बार कर रही हैं। पर्व के दौरान घर में पारंपरिक गीत गाए जाते हैं, गेहूं धोकर प्रसाद की तैयारी की जाती है और पूरे चार दिनों तक नियमपूर्वक व्रत रखा जाता है।


प्रशासन की ओर से घाटों पर साफ-सफाई, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। चार दिवसीय इस महापर्व के अगले चरण में खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य के साथ छठ पूजा संपन्न होगी, जिसमें श्रद्धालु अस्ताचलगामी और उदयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगे।

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