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बिहार में पशुपालन और मत्स्य पालन को मिल रही है नई ऊंचाइयां

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माई पीडीए समाचार
द्वारा संपादित : KAJAL TIWARI |
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बिहार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 की उपलब्धियों का ब्यौरा पेश करते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का दावा किया है। पशुपालन मंत्री सुरेंद्र मेहता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सरकार की योजनाओं से पशुपालकों, डेयरी किसानों और मत्स्य पालकों की आय में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।


पशुपालन विभाग के तहत समेकित मुर्गी विकास, बकरी-भेड़ विकास और मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई जैसी योजनाओं का व्यापक विस्तार किया गया है। वर्ष 2025-26 में मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई के जरिए 22 लाख से अधिक पशुओं का इलाज और प्रचार-प्रसार संबंधी कार्य किए गए।


वहीं पशु चिकित्सालयों में 55 लाख से ज्यादा पशुओं की चिकित्सा, 1.78 लाख बधियाकरण और 32 हजार से अधिक पैथोलॉजिकल जांच की गई। राज्य में खुरपका-मुंहपका, लंपी और ब्रुसेलोसिस जैसी बीमारियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया गया।


डेयरी क्षेत्र में गव्य विकास निदेशालय और कॉम्फेड के माध्यम से ‘सुधा’ ब्रांड ने नई ऊंचाइयां हासिल की हैं। राज्य में प्रतिदिन औसतन 22 लाख किलोग्राम दूध संग्रह किया जा रहा है, जबकि कॉम्फेड की प्रोसेसिंग क्षमता 54 लाख लीटर प्रतिदिन है।


मत्स्य क्षेत्र में भी बिहार ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। पिछले दस वर्षों में औसत 8.9 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ राज्य अब राष्ट्रीय स्तर पर चौथे स्थान पर पहुंच गया है। वर्ष 2024-25 में मत्स्य उत्पादन बढ़कर 9.59 लाख मीट्रिक टन हो गया।

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